झारखंड संयुक्त स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा 2016 की आत्मकथा

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            झारखंड संयुक्त स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा  2016 की आत्मकथा

1-     2013 का आखरी महीना यही वह दौर था जब पूरे देश में एक लहर चल रही थी, एक ऐसी लहर जिसे आने वाली कई पीढ़ियां याद रखेंगे उस लहर का नाम था-‘ मोदी लहर’। पूरे देश में बदलाव की आंधियां चल रही थी | ऐसा लग रहा था कि अब भारत बिल्कुल कांग्रेस मुक्त हो जाएगा। टीवी चैनलों पर हर 5 मिनट में ‘’ अच्छे दिन आने वाले हैं मोदी जी आने वाले हैं ‘’  का प्रचार चलते रहता था। इसी दौरान मिडिया  में विभिन्न समाचार पत्रों में खबर आनी शुरू हुई कि हाई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी चल रही है और लगे हाथ बीजेपी ने इसे झारखंड विधानसभा चुनाव में चुनावी मुद्दा बना लिया  | 2014 में विधानसभा चुनाव संपन्न हुआ , मोदी जी प्रधानमंत्री बने राज्य में पहली बार बहुमत की सरकार बनी पहली बार गैर आदिवासी मुख्यमंत्री रघुवर दास बने |
2-     सन 2014 में सैकड़ों उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री जी ने इस बात का जिक्र किया कि सरकार शीघ्र ही हाई स्कूल शिक्षकों की नियुक्ति करने वाली है|  लगभग 1 साल तक इसकी घोषणा करके ही काम चला लिया गया। लोग समाचार पत्रों में पढ़ते की हाई स्कूल की नियुक्ति शीघ्र आने वाली है और खुश होकर आस लगाने लगते हैं | खासकर युवा वर्ग ऐसे लुभावने सपने में ज्यादा फंसते हैं।
                                  2014 नई सरकार का बीत गया लेकिन हाई स्कूल नियुक्ति का विज्ञापन नहीं आया
3-      2015 में भी इसका बाउंड्री ही बांधा गया |  पूरे देश मोदी जी के नेतृत्व वाली नई सरकार के 100 दिन तो कभी 6 माह फिर 1 साल पूरे होने के जश्न मनाने लगे , अच्छे दिन का इंतजार करना लोगों ने शुरू किया | हाई स्कूल नियुक्ति की खबर बीच-बीच में समाचार पत्रों में आती रही कि शीघ्र आने वाली है ...................18000 हाई स्कूल शिक्षकों की नियुक्ति शीघ्र आने वाली है...................... जल्द होने वाली है.................................. अगले माह होने वाली है झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा शीघ्र ही विज्ञापन निकाला जाएगा.............................
4-    2016 के शुरू में समाचार पत्रों में यह फिर से छपना शुरू हुआ कि फरवरी लास्ट में हाई स्कूल का विज्ञापन आएगा फिर मार्च में छपा की जुलाई-अगस्त में विज्ञापन आएगा इसी तरह 2016 भी आधा बीत गया विज्ञापन नहीं निकला।
5-      फिर 8 नवंबर 2016 का वह ऐतिहासिक दिन तो सबको याद ही होगा जब रात्रि में 8:00 बजे मोदी जी ने नोटबंदी का ऐलान किया पूरे देश में अगली सुबह भूचाल सा आ गया । हर तरफ सिर्फ बैंक ATM लंबी लाइन, जोड़-तोड़ ,काला धन, बस इन्हीं के चर्चे छह माह तक चले|  500 और 1000 बदलने के चक्कर में युवा वर्ग हाई स्कूल नियुक्ति परीक्षा भूल गए ।
6-     साल 2016 खत्म होने में मात्र 2 दिन बचे थे की 28 दिसंबर 2016 को हाई स्कूल का विज्ञापन झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा जारी किया गया।
7-     झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी का हाईकोर्ट के साथ चोली-दामन का रिश्ता है | झारखंड में होने वाली कोई भी नियुक्ति परीक्षा बिना हाई कोर्ट गए शायद ही कभी संपन्न हुई हो | पहले विज्ञापन के साथ ही राज्य भर में धरना विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया , विभिन्न छात्र संगठनों ने जेएसएससी और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया |
                          कारण था विज्ञापन में भारी विसंगतियां | पहले विज्ञापन में इतिहास के साथ राजनीति विज्ञान , गणित के साथ भौतिकी और बायोलॉजी के साथ केमिस्ट्री विषयों को जोड़ दिया गया तथा 45% अंकों की अनिवार्यता रखी गई | राज्य को 13 जिला अनुसूचित और  ग्यारह जिला गैर अनुसूचित बना दिया गया | अनुसूचित जिलों में सिर्फ उसी जिले के वासी आवेदन कर सकते थे जबकि गैर अनुसूचित जिले में पूरे भारत का कोई भी स्नातक प्रशिक्षित छात्र आवेदन कर सकता था | इसके साथ ही नेगेटिव मार्किंग का भी प्रावधान रखा गया था जिसका छात्रों ने उग्र विरोध किया।
8-     विज्ञापन को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई | छात्र हरि शर्मा और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने विज्ञापन रद्द करते हुए पुनः संशोधित विज्ञापन निकालने का आदेश दिया| इसी बीच गैर अनुसूचित जिला में गोड्डा सबसे ज्यादा हाईलाइट चल रहा था | विभिन्न छात्र संगठन आए दिन  ही विरोध प्रदर्शन निकालते रहते थे | गोड्डा के एक छात्र विवेकानंद भारती वह कुछ अन्य छात्रों ने गोड्डा के कारगिल चौक पर सामूहिक मुंडन करा कर विरोध प्रकट किया तो प्रशासन ने उन छात्रों पर गुंडा एक्ट लगा कर सलाखों के पीछे डाल दिया।
9-    हाई कोर्ट के आदेशानुसार पुनः  4 फरवरी 2017 को संशोधित विज्ञापन निकाला जिसमें नेगेटिव मार्किंग और विषय बाध्यता को हटाया गया।
10-   17900 पदों के लिए लगभग 110000 आवेदन प्राप्त हुए।
11-   इस बीच जाति आवासीय बनवाने के लिए भी छात्रों को लंबी जद्दोजहद करनी पड़ी | ऑनलाइन विज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेखित था कि जाति आवासीय प्रमाण पत्र फरवरी 2017 से पहले का बना हुआ हो
12-   मार्च 2017 आ गया झारखंड संयुक्त स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा 2016 का फॉर्म छात्र भर चुके थे |  अब बस जी जान से छात्रों को अपनी अपनी तैयारी में झूठ जाना था |  परीक्षा का फॉर्म भरकर परीक्षा तिथि से पहले तक के बीच का जो समय होता है ना यही किसी प्रतियोगी छात्र के जीवन का सबसे उम्मीदों से भरा समय होता है  | फिर से हाईस्कूल तैयारी के नाम पर सैकड़ों ग्रुप सोशल मीडिया में तैरने लगे |  धुआंधार तैयारी में छात्र जुट गए,  कुछ तो बोरिया बिस्तर समेट कर रांची लॉज या हॉस्टल में शिफ्ट कर गए,  कोचिंग सेंटरों में बहार आ गई , पतंजलि,  शिवआंगन उपकार के गाइड मार्केट में छा गए,  कितने छात्रों ने प्राइवेट स्कूलों से छुट्टी ले ली,  अनेकों कहानियां और आपबीती अनुभव इस तैयारी को लेकर छात्रों के अपने-अपने बिखरे हुए हैं जो केवल एक हाईस्कूल कैंडिडेट ही जान व  समझ सकता है।
13-   अब एक नया कोतूहल का विषय फिर से सोशल मीडिया में छाया कि किस जिले के किस विषय में कितने आवेदन पड़े हैं ? सब अपने अपने विषय का अनुमान   दावे के साथ कर रहे थे | इसी बीच परीक्षा की तिथि की भी चर्चा व अटकलें बीच-बीच में चलती रहती थी।
14-  फिर वह दिन भी आ गया जिसके लिए छात्र पिछले 3 साल से इंतजार कर रहे थे |  परीक्षा की तिथि की घोषणा हुई 29 अक्टूबर 2017 से 2 दिसंबर 2017 तक परीक्षा चली |
                                                              पूरे गांव , मोहल्ले , पत्नी ,  परिवार,  सब का आशीर्वाद लेकर छात्र निकलता है घर से एग्जाम देने के लिए | 4 दिन पहले से ही रांची जाने वाली सभी बस एडवांस बुक है , ट्रेनों में भी दूर-दूर तक वेटिंग लिस्ट का जाल  फैला हुआ है |  कोई छात्र अपनी बारात में भी इतनी शिद्दत व उम्मीद के साथ नहीं जाता होगा जितना कोई छात्र प्रतियोगिता परीक्षा देने जाने के दौरान गंभीर वह किला फतह के उद्देश्य से निकलता है।
                         खास करके मेरे जैसे छात्र ट्रेन में भीड़ देखकर , बसों में खड़े-खड़े रात भर सफर करके रांची पहुंचने वाले छात्रों को देखकर घबराते नहीं हैं बल्कि जीत के इरादे और मजबूत होते चले जाते हैं | रांची हटिया पटना इंटरसिटी पर टॉयलेट के पास गमछा बिछा कर रात भर ग्रुप डिस्कशन , पूरा ट्रेन ही हाईस्कूल कैंडिडेट से भरा हुआ,  खैनी , पान पुरिया,  ताश ,   आदि का दौर चलते हुए सुबह-सुबह रांची पहुंचते हैं |  टॉयलेट,  बाथरूम , चाय ,  सबके लिए लाइन फिर भी मन में हाई स्कूल एग्जाम क्लियर करने के मजबूत इरादे मौजूद थे।
15-  बीच में कुछ परीक्षा की तिथियों में बदलाव भी हुए।
16-   फर्स्ट पेपर की परीक्षा इतने आसान हिंदी सवालों के साथ संपन्न हुआ कि छात्रों ने क्वालीफाइंग नंबर से आगे टिक मारना ही उचित नहीं समझा खास करके फर्स्ट पेपर का वह सोमा बुआ वाला पैसेज  तो सभी को याद ही होगा
17-   अब सबको इंतजार था आंसर की का
18-   सबसे पहले शारीरिक शिक्षा का आंसर की आया और आंसर की में अनेक विसंगतियों के कारण छात्रों ने फिर से धरना विरोध प्रदर्शन करना शुरू किया |
19-   जेएसएससी अपनी घोंघा चाल में हमेशा चलती रहती है | विरोध ,  धरना प्रदर्शन , पुतला दहन , यह सब देखते हुए ही जेएसएससी और जेपीएससी जवान होते-होते 16 साल की हुई है इसलिए इन सब का इसके ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है | अंततः 30 नवंबर 2017 को अन्य विषयों का भी आंसर की जारी कर दिया गया।
20-  फाइनल आंसर की जारी होने के बाद सोशल मीडिया में एक बार फिर भूचाल आ गया |  अब शुरू हुआ कट ऑफ  के अनुमान का खेल|  सब अपने-अपने जिला व अपने सब्जेक्ट का कैंडिडेट खोजने लगे , विभिन्न जिलों के सब्जेक्ट वाइज जिला वाइज ग्रुप के लिंक सोशल मीडिया में फैल गए | लाइक , कमेंट , शेयर,  का दौर चल पड़ा कटऑफ की बेकरारी का आलम क्या था यह WhatsApp के एक मैसेज से बयान हो सकता है-
" एग्जाम से लेकर यह कटऑफ निकलने तक का जो समय है ना यही है जिंदगी ।

1. हर सुबह उम्मीद के साथ उठना कि आज कटऑफ निकल जाएगा

2. दिन भर में कम से कम 75 बार इस पेज को खोलना कि शायद किसी ने कटऑफ बताया हो

3. जेएसएससी के साइड में रोज झांकना

4. अपने अपने सब्जेक्ट और जिला का एक ग्रुप खोजना

5. हर रोज कटऑफ का मंथन करना

6. किसी ने कट ऑफ बता दिया और अपना उसमें नंबर नहीं आ रहा है तो उस कटऑफ को ही गलत बता देना

7. अपने जिला का WhatsApp ग्रुप खोजना

8. किसी भी काम में मन ना लगना

9. मन-ही-मन अपने सब्जेक्ट के टोटल कैंडिडेट का हिसाब लगाना

10. हर रोज कैलेंडर देखना कि मई जून कब आएगी

  कोई और होगा कोई पार होगा लेकिन जिंदगी यहीं खत्म नहीं होती है।


21-   फरवरी 2018 तक  लगभग सभी जिलों का व सभी सब्जेक्ट का कट ऑफ का अनुमान लगाया जा चुका था | अब झारखंडी मूलवासियों के चेहरे का रंग उड़ने लगा था |  11 जिलों में बाहरी छात्र सब जगह आगे थे।
22-  बहारियों  में सबसे ज्यादा यूपी बंगाल उड़ीसा तथा बिहारियों का भीड़ था | बहारियों का सबसे ज्यादा अतिक्रमण गिरिडीह पलामू व धनबाद इन्हीं 3 जिलों में हुआ था | अकेले इन्हीं 3 जिलों में 80 हजार से ज्यादा आवेदन डाले गए थे।
23-   अब जब सभी जिलों वह सब्जेक्ट के कटऑफ का अनुमान लगाया जा चुका था । सभी रुझान आ चुके थे | तब शुरू हुआ 13 और 11 का खेल | झारखंडी मूलवासियों को यह एहसास हो चुका था कि बाहरी छात्र 11 गैर अनुसूचित जिले में हर जगह हावी हैं | अगर 13-11 की यही नीति चली तो वह नौकरी से हाथ धो बैठेंगे |
                                                  बस फिर क्या था 11  गैर अनुसूचित जिलों में छात्रों का जुटान होना शुरू हुआ | एक बार फिर पुरानी चिंगारी की आग धधक उठी | हजारीबाग में हुई रैली ने सरकार की नींव हिला दी | विधानसभा में मामले को उठाया गया। सदन में सत्ता पक्ष के विधायकों को भी इस जन आक्रोश का एहसास हो गया था |  विपक्ष के साथ पक्ष ने भी इसका समर्थन किया | अब निर्णय मुख्यमंत्री रघुवर दास को लेना था।
24-   फरवरी 2018 में राज्य सरकार ने आनन-फानन में मंत्री अमर बाउरी की अध्यक्षता में एक समिति गठित कर दी जिसे 15 दिनों में गैर अनुसूचित जिलों में स्थानीय की नियुक्ति पर विचार कर अपना रिपोर्ट देना था
25-   15 दिन के जगह डेढ़ माह बावरी कमेटी अपना रिपोर्ट देने में लगाई  |इस बीच कमेटी ने  पड़ोसी राज्यों में स्थानीयता की नीति के अध्ययन के नाम पर जमकर भ्रमण किया | कुछ छात्रों ने इसे पिकनिक कमेटी की भी संज्ञा दी।
26-  इस बीच कहानी में एक और ट्विस्ट आता है - मार्च 18 में जेएसएससी ने 2 जिले गोड्डा और गिरिडीह में अर्थशास्त्र की परीक्षा तकनीकी कारणों से बताते हुए रद्द कर दी |  इसकी पुनः परीक्षा 1 अप्रैल 2018 को ली गई सब परीक्षार्थियों का नंबर फिर से उलट-पुलट हो गया | कितने के चेहरे जो पहले उदास थे फिर खिल उठे तो कुछ छात्र अपना पुराना नंबर भी गवा बैठे
27-   17 अप्रैल 2018 को बावरी कमेटी मैं अपना रिपोर्ट सरकार को सौंप दिया जिसमें गैर आरक्षित जिलों में भी अगले 10 वर्षों तक स्थानीय ों की नियुक्ति ही हो इस की अनुशंसा की गई लेकिन स्थानीय के नाम पर 1932 खतियान वाला जिन्न फिर से बोतल के बाहर आ गया |  यह 1932 के खतियान वाला वही जिन है जो पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी वाली  सरकार को निगल गई थी।
28-   इस बीच अर्थशास्त्र के रद्द हुए परीक्षा की औपबंधिक उत्तर कुंजी जारी हुई |  अंतिम उत्तर कुंजी आना अभी बाकी है।
29-   अप्रैल 2018 के अंतिम दिनों में यह खबर आ रही है कि सरकार बावरी कमेटी की रिपोर्ट पर महाधिवक्ता से राय ले रही है।
30-  परीक्षा के आज 5 माह पूरे हो चुके हैं छात्र अभी रिजल्ट के इंतजार में हैं इसी दौरान कितने कुंवारे छात्र ने अपना दर्द सोशल मीडिया पर बयान किया है हाई स्कूल कैंडिडेट के शादी विवाह , तिलक,  दहेज,  सब रुके पड़े हैं | छात्रों की व्यक्तिगत जिंदगी भी अब इससे प्रभावित हो रही है।
31-   आज 2 मई 2018 का ताजा अपडेट यही है कि विभिन्न जिले के छात्र संगठन आजकल उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र लंबित रिजल्ट प्रकाशन कराने की मांग कर रहे हैं
32   सफ़र आगे भी जारी रहेगा ..................................................
                                                                                                        GANGESH GUNJAN
                                                                                                                                                                       9576632105

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